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Bajbahadur-Rupmati

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Book Name- Bajbahadur-Rupmati

Author- Laxmidatt Sharma ‘Anjan’

Binding- Hardbound with Jecket

Situation- In Stock

Publication- Disha Prakashan (Ams Wing)

ISBN : 978-93-84713-19-5

Language- Hindi

Catigory- Historical Novel

Pages- 158

300.00 277.00

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Product Description

‘बाजबहादुर-रूपमती’ (अमर प्रणयगाथा) के नाम से हिन्दी साहित्य को एक ऐतिहासिक उपन्यास मिला है, जिसे लक्ष्मीदत्त शर्मा ‘अन्जान’ ने लिखा परन्तु उनके रहते इसे प्रकाशित स्वरूप नहीं मिल पाया। अब उनके दामाद, श्री सन्तोष मोहन्ती ने ‘बाजबहादुर-रूपमती’ को प्रकाशित करा दो तरह से अनुकरणीय कार्य किया है। एक तो स्व. श्वसुर को सम्मान देते हुए उनकी स्मृतियों को चिर-स्थाई बना दिया, दूसरे साहित्य प्रेमियों को माण्डव के इतिहास और उससे जुड़े सबसे चर्चित नायक बाजबहादुर को जीवन्त कर दिया। अब इस उपन्यास से माण्डव में घूमने पर बाजबहादुर-रूपमती एवं अन्य सन्दर्भ जीवन्त नज़र आएंगे। मुगल सल्तनत से सम्बंधित उपन्यासों में सौन्दर्य, कला-प्रेम के साथ युद्ध का वर्णन बहुतायत से होता है और ऐसा ही कुछ ‘अन्जान’ की कृति ‘बाजबहादुर-रूपमती’ में भी मिलेगा।

अफगान सुल्तान बाजबहादुर और लावण्य सुन्दरी रूपमती की प्रणयगाथा से विश्व परिचित है। इनके बिना अफगान-मुगल इतिहास एवं प्रेम-मौहब्बत का संसार वीरान नज़र आता है। ‘अन्जान’ जी माण्डव के चप्पे-चप्पे से परिचित थे।

‘बाजबहादुर-रूपमती’ उपन्यास में नायक बाजबहादुर हैं। उन्हें केन्द्र में रखकर सम्पूर्ण घटनाएं घटित होती हैं। उपन्यास की दृष्टि से जो भी आवश्यक तत्व हैं, जैसे कथानक, कथोपकथन, प्रकृति, मौसम, सौन्दर्य, युद्ध, जय-पराजय सभी का सजीव वर्णन है। बाजबहादुर नाम के अनुरूप है जो एक सच्चा प्रेमी है तो एक बहादुर योद्धा भी है। वह बार-बार हारकर भी जीत के लिए जीवित रहता है, और अन्ततः जीत हासिल करता है।

हिन्दुस्तान में कई ऐसे प्रेमी हुए हैं जिन्होंने मोहब्बत में अपना सबकुछ कुर्बान कर दिया पर रूपमती और बाजबहादुर की प्रेमकथा नितान्त रूप से व्यथाओं से भरी है और आंसुओं के साथ माण्डव-मालवा की सांस्कृतिक विरासत के रूप में आज भी हमारे सामने है। हजारों लोग भले ही किसी भी दृष्टि से हर वर्ष माण्डव आते हैं पर वे रूपमती-बाजबहादुर की प्रेमगाथा में डूब जाते हैं। ‘अन्जान’ जी ने अपने नायक बाजबहादुर के साथ पूरा न्याय किया है। उसके सम्पूर्ण जीवन और चरित्र को अच्छाइयों और कमजोरियों को समान मानते हुए, प्रस्तुत किया है। कथावस्तु रोचकता के साथ प्रवाहित होती है। श्रृंगार, वीर और करूण रस की त्रिवेणी है यह उपन्यास ‘बाजबहादुर-रूपमती’।

रानी रूपमती और बाजबहादुर के प्रेम का प्रतीक माण्डव आज खण्डहर में परिवर्तित होता जा रहा है पर ‘अन्जान’ जी की यह कृति तमाम लोगों को माण्डव और इसके अतीत से परिचित कराते हुए रंगों से भर देगी।

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